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मई, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

mowgli ki kahani असली मोगली कौन है?

 दोस्तों आज आप जानेंगे कि कार्टून का एक फेमस कैरेक्टर मोगली की सच्चाई के बारे में क्या मोगली एक काल्पनिक कथा है या इसका किसी व्यक्ति विशेष से ताल्लुक है या नहीं दोस्तों मोगली की कहानी हमने सुनी है पड़ी हुई है और कार्टून और फिल्मों के माध्यम से देखी भी है आज मैं आपको इस पूरे लेख के माध्यम से बताने वाला हूं कि आप जिस कार्टून कैरेक्टर के प्रेमी थे बचपन में वह कार्टून कैरेक्टर को कैसे बनाया गया किस आधार पर बनाया गया और किसके द्वारा बनाया गया इस कार्टून कैरेक्टर को बनाने वाले roudyard kipling थे इन्होंने 1894 मैं roudyard kipling ने इस किरदार को द जंगल बुक नाम की इस रचना को प्रस्तुत किया थालेकिन किंतु परंतु क्या आप जानते हैं यह जो काल्पनिक किरदार था जिसका नाम मोगली रखा गया क्या वह सिर्फ कल्पनिक कहानी थी ऐसा नहीं है दोस्तों आपको बता दें की इस कहानी का का आधार हमारे भारत के बिहार से जुड़ा हुआ है अब आप ध्यान से पढ़िए आपको यह बता दूं कि यह द जंगल बुक नाम की जो मूवीस आपने देखी है इसका किरदार मोगली का जो जीवन आपने मूवी में स्टोरी में देखा वह पढ़ा होगा समझा होगा वह किरदार हमारे भारत के एक व्यक्त

संघर्ष - अमेरिकी राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन का

दोस्तों आज की हमारी आज की कहानी है अमेरिकी राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन की इन्होंने किस प्रकार और कितना संघर्ष किया है आज आप इस स्टोरी को पढ़कर जानेंगे यह स्टोरी मोटिवेशनल से भरी हुई है तो ध्यान से पढ़िए गा चलिए शुरू कर ही देते हैं दोस्तों यह कहानी की शुरुआत 12 फरवरी  1809 को होती है. जब अमेरिकी राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन का जन्म हुआ इनका जन्म एक झोपड़ी में रहने वाले गरीब परिवार में हुआ और आगे चलकर यही बंदा राष्ट्रपति बना एक झोपड़ी से निकलकर राष्ट्रपति भवन तक जाने किन की कहानी बहुत ही मोटिवेशनल से भरी है यदि यकीन मानिए आप इनकी जगह होते तो शायद आप डिप्रेशन की बीमारी का शिकार हो जाते जब यह मात्र 2 साल के थे तभी इन्हें जमीनी विवाद के कारण अपने निजी घर को छोड़ किसी अन्य जगहों पर जाकर रहना पड़ा. संघर्ष अमेरिकी राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन का  यह तो प्रॉब्लम्स की शुरुआत थी उस नई जगह में रहते हुए करीब 5 साल बीत गए वहां पर भी जमीनी विवाद चला जिस कारण उन्हें यह घर भी छोड़ना पड़ा इस समय इब्राहिम लिंकन की उम्र मात्र 7 साल की थी जमीनी विवाद के कारण उनको अपना घर छोड़ना पड़ा और वह और उनका परिवार इंडियाना के न

महाराणा प्रताप का छोटा सा जीवन परिचय

महाराणा प्रताप का जन्म 9 मई 1540 में हुआ था इस दिन जेष्ठ शुक्ल का दिन था और इसी दिन राणा प्रताप की जयंती भी बनाई जाती है और जिस वार को इनका जन्म हुआ वह वार था रविवार इस तारीख को विश्व के ऐसे योद्धा ने जन्म लिया जो स्वतंत्रता और राष्ट्रभक्ति के लिए जाने गए जन्म स्थान कुंभलगढ़ के भीतर एक महल है जिसका नाम है बादल महल इस महल में दो कक्ष हैं जनाना कक्ष और मर्दाना कक्ष जनाना कक्ष में जुनी कचहरी के भीतर महाराणा प्रताप का जन्म हुआ महाराणा प्रताप के पिता का नाम उदय सिंह इनकी मां का नाम था जयंताबाई केजन्म के बाद जब वह 17 वर्ष के हुए तब उनका विवाह अजब्दे पवार से हुआ इनके पिता के सर्वश्रेष्ठ पुत्र महाराणा प्रताप थे किंतु महाराणा प्रताप की के पिता उदय सिंह की एक दूसरी पत्नी भी थी जिनका नाम धीरबाई था।  महाराणा प्रताप के पिता का लगाओ उनकी छोटी रानी  धीरबाई  से बहुत ज्यादा था उदय सिंह ने अपनी छोटी रानी के पुत्र जो राजा उदय सिंह के नवे पुत्र बने जिनका नाम  जगमाल को अपने जीवित रहते हुए ही अपना उत्तराधिकारी बना देते हैं. उदयसिंह की मृत्यु 1572 में हुई इनकी मृत्यु के बाद इनकी जो दूसरी रानी थी

बादशाह अकबर का मनहूस नौकर

दोस्तों सुबह का समय था बादशाह अकबर अपने बिस्तर पड़े पड़े पानी मांगे जा रहे थे आस पास उनका कोई सेवक नजर नहीं आ रहा था पता नहीं कहां से महल के भीतर जो शौचालय को साफ़ स्वच्छ रखने वाला व्यक्ति बादशाह महाराज के कक्श के सामने से गुजर रहा था। तभी नौकर ने उनकी आवाज सुन ली और पानी का गिलास लेकर उनके पास आ गया. बादशाह अकबर को इतनी प्यास लगी थी कि वे खुद को उसके हाथ से पानी लेने से नहीं रोक पाए तभी वहां बादशाह अकबर के मुख्य सेवक आ गए और उन्होंने कचरा साफ करने वाले को वहां से डाट कर वहा से निकाल दिया। अकबर का पेट भी खराब हो गया था तभी हकीम को भी बुलवाया गया महाराज की हालत में सुधार नहीं हुआ। फिर रात में भी आए उनके साथ आये ज्योतिषी भी थे उन्होंने कहा शायद आप पर किसी व्यक्ति का साया पड़ा है इसलिए तबीयत खराब हुई है बादशाह अकबर को तुरंत उस कचरा साफ करने वाले नौकर का ख्याल आया और उन्होंने सोचा उस मनहूस के हाथ से पानी पीकर मैं बीमार हुआ हूं। और बादशाह अकबर ने गुस्से में उसे सजा ए मौत सुना दी।  बादशाह अकबर का मनहूस नौकर  जब बीरबल को इस बात का पता चला तो वह उसके पास गए और उसे तसल्ली देने लगे औ

बीरबल कैसे बना नवरत्न- अकबर और बीरबल की कहानी

बीरबल कैसे बना नवरत्न -  एक समय की बात महाराजा बादशाह अकबर अपने मंत्रियों के टोली के साथ शिकार पर निकले थे अब काफी दिन भी चुके थे काफी दिन बीतने के बाद उन्हें कोई भी शिकार नहीं था कई दिन बीत जाने के बाद एक दिन राजा अकबर ने शेरखान से कहा कि तुमने तो मुझे कहा था कि हमारा जंगल शिकार से  भरा हुआ है तो राजा ने कहा कि ऐसा लगता तो नहीं है फिर हिचकीचाते हुए शेर खान ने कहा कि मैं माफी चाहता हूं बादशाह।  लेकिन पिछली बार बस शेर खान ने इतना हीं कहा था कि राजा ने उसे टोकते हुए कहा कि मैं अपने महल वापस जाना चाहता हूं और वह भी इसी वक्त मैं निकलता हूं मैं तुमसे आगरा में बात करूंगा नाराज बादशाह अकबर अपने   अन्य सैनिकों के साथ आगरा के महल की तरफ निकल पड़े.l  अकबर और बीरबल की कहानी जब बादशाह जंगल से अपने महल की ओर जा रहे थे तभी उन्हें एक रास्ते में एक नवयुवक दिखा राजा ने उसे रोका और कहा रुको जवान क्या तुम हमें बता सकते हो कि इनमें से कौन सा रास्ता आगरा को जाता है तो उस लड़के ने कहा कि इनमें से कोई भी रास्ता आगरा की तरफ नहीं जाता है राजा ने कहा क्या बकते हो।  तो लड़के ने कहा रास्ता नहीं जाता महाराज लोग जा