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बीरबल कैसे बना नवरत्न- अकबर और बीरबल की कहानी

बीरबल कैसे बना नवरत्न - एक समय की बात महाराजा बादशाह अकबर अपने मंत्रियों के टोली के साथ शिकार पर निकले थे अब काफी दिन भी चुके थे काफी दिन बीतने के बाद उन्हें कोई भी शिकार नहीं था कई दिन बीत जाने के बाद एक दिन राजा अकबर ने शेरखान से कहा कि तुमने तो मुझे कहा था कि हमारा जंगल शिकार से  भरा हुआ है तो राजा ने कहा कि ऐसा लगता तो नहीं है फिर हिचकीचाते हुए शेर खान ने कहा कि मैं माफी चाहता हूं बादशाह।

 लेकिन पिछली बार बस शेर खान ने इतना हीं कहा था कि राजा ने उसे टोकते हुए कहा कि मैं अपने महल वापस जाना चाहता हूं और वह भी इसी वक्त मैं निकलता हूं मैं तुमसे आगरा में बात करूंगा नाराज बादशाह अकबर अपने   अन्य सैनिकों के साथ आगरा के महल की तरफ निकल पड़े.l 


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अकबर और बीरबल की कहानी

जब बादशाह जंगल से अपने महल की ओर जा रहे थे तभी उन्हें एक रास्ते में एक नवयुवक दिखा राजा ने उसे रोका और कहा रुको जवान क्या तुम हमें बता सकते हो कि इनमें से कौन सा रास्ता आगरा को जाता है तो उस लड़के ने कहा कि इनमें से कोई भी रास्ता आगरा की तरफ नहीं जाता है राजा ने कहा क्या बकते हो। 

तो लड़के ने कहा रास्ता नहीं जाता महाराज लोग जाते हैं यह सुन राजा और सभी सैनिक जोरों से हंसने लगे तब महाराजा ने कहा कि हां तुमने सही कहा और पूछा कि बताओ तुम्हारा नाम क्या है तो उस लड़के ने अपना नाम महेश दास बताया और राजा से पूछा कि अब आप अपना नाम बताएं कौन हैं आप। 

तब बादशाह अकबर ने कहा कि तुम बादशाह अकबर से बात कर रहे हो पूरे हिंदुस्तान के बादशाह से मुझे मेरे दरबार में तुम जैसे निडर और हंसमुख नौजवान की जरूरत है अगर तुम मेरे सेना में शामिल होना चाहते हो तो इस अंगूठी को लेकर मेरे पास आना और मैं तुम्हें तुरंत पहचान लूंगा खैर तुम हमें आगरा जाने का रास्ता बताओ क्योंकि हम बहुत थके हुए हैं और हमें सूरज ढलने से पहले आगरा पहुंचना है 

कई वर्षों बाद जब महेश दास जंगल के उसी मोड़ से गुजर रहे थे तब उन्हें बादशाह अकबर की बात याद आई महेश दास बादशाह के दरबार में पहुंचे तभी वहां दरबार ने कहा तुम कौन हो कहां जा रहे हो तो उसने कहा कि मैं  बादशाह से मिलना चाहता हूं तभी दरबार ने कहां  मैं अनुमति लेकर आता हूं अनुमति मिलने पर महेश दास बादशाह अकबर के समक्ष खड़े हुए बादशाह ने कहा कहो क्या तकलीफ है

महेश दास ने कहा महाराज मैं महेश दास हूं बादशाह अकबर ने नाम सुनते ही कहा किए नाम कहीं सुना हुआ लग रहा है बताओ क्या चाहते हो तब महेश दास ने उनकी दी हुई अंगूठी दिखाई तब महाराजा को याद करते हुए कहते हैं महेश मुझे याद है मैं तुम्हें पहचान गया मुझे तुम्हारा मजाक बहुत पसंद आया था लेकिन मैं तुम्हारा इम्तिहान लेना चाहूंगा यह जानने के लिए क्या तुम वही आदमी हो या कोई और यह जानने के लिए मेरे दरबार के पांच मंत्री तुमसे कुछ सवाल पूछेंगे देखते हैं तुम उन्हें क्या जवाब देते हो। 

बादशाह का यह फरमान सुनकर उनके मंत्रियों ने सवाल पूछने शुरू करे . पहला सवाल ऐसे  पड़ोसियों के बारे में बताओ जो एक दूसरे को देख नहीं सकते महेश दास दास ने जवाब दिया आंखें जवाब है आंखें आंखें एक दूसरे को नहीं देख सकती।

दूसरा सवाल एक ऐसे दुश्मन का नाम बताओ जिसे हराया नहीं जा सकता तो इस सवाल का जवाब महेश दास ने दिया कि वह है मौत मृत्यु मृत्यु को कभी हराया नहीं जा सकता। 

तीसरा सवाल ऐसा क्या है जो मौत के बाद भी जिंदा रहता है तो महेश दास ने जवाब दिया महिमा।

फिर चौथा सवाल पूछा गया सवाल में सिर्फ एक रेखा थी यानी कि 1 लाइन जिसे अन्य मंत्री द्वारा चूने[चौक] के माध्यम से फर्श पर लाइन बना दी गई थी और महेश दास से कहा गया कि इसे बिना छुए छोटा करके बताओ तब महेश दास ने सम्मान पूर्वक आगे बढ़ते हुए उन मंत्री के हाथ से चूने[चौक] लिया और उस लाइन से एक बड़ी लाइन खींची थी और कहा कि आपकी लाइन यानी कि आप की रेखा बिना मिटाए छोटी हो गई है.

अब आई पांचवे सवाल की बारी अन्य मंत्री द्वारा पूछा गया कि कुछ ऐसा बताओ कि जिसे ना तो चांद देख सकता है और ना ही सूरज तो बड़ी सरलता से महेश दास ने जवाब दिया अंधकार यानी कि अंधेरा ना सूरज देख सकता है ना चंद्रमा पांचो सवाल के सटीक जवाब देते हुए महेश दास अपने स्थान पर सर झुकाए खड़े थे.

तभी बादशाह अकबर ने उनसे एक सवाल पूछा बताओ बताओ आगरा की गलियों में कितने मोड़ हैं  महेश दास ने इसका भी जवाब दिया कि बादशाह आगरा की गलियों में मात्र दो मोड़ है एक मोड़ दाएं दूसरा मोड़ बॉय हर नगर हर देश की गलियों में महलों में दो ही मोड़ होते हैं मोड़ का प्रकार तो दो होता है एक हो ता दाएं दूसरा होता है बाय.

सभी जवाबों का सटीक जवाब मिलने पर राजा ने महेश दास को कहा आज से तुम मेरे महल के नवरत्नों में से एक हो गए हो और तुम्हें आज से महाराज बीरबल के नाम से संबोधित किया जाएगा जाना जाएगा तभी महल में सैनिकों द्वारा महाराज बीरबल की और महाराजा अकबर की जय जयकार होने लगी.

तो दोस्तों यह कहानी आपने जो पड़ी इससे आपको मन प्रसन्न हो गया होगा और यदि कोई आपसे इस प्रकार के सवाल करता है आपकी बुद्धि क्षमता बुद्धि बल को जानने के लिए और आप इस प्रकार के सटीक जवाब देते हैं तो आप बुद्धिमान कहलाते हैं महाराजा अकबर और बीरबल की कहानी से हमें सीख मिलती है कि हमें कब और किस बारे में किस तरह की सूझबूझ रखना चाहिए दोस्तों मेरे इस पोस्ट को आप अपने दोस्तों तक पहुंचाएं शेयर करें ताकि वह भी अपने ज्ञान भंडार को बढ़ा सकें मेरी वेबसाइट का नाम याद रखें मैं इस प्रकार की रोचक कहानियां आपको इस वेबसाइट के माध्यम से आप तक पहुंचा तो रहूंगा धन्यवाद. HONG KONG में 4 अंक का मतलब

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